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Showing posts from November, 2020

परमसत्य की खोज...7 (Discovery of the absolute truth ... 7)

  ( अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...7 8 दिसम्बर 2003 एक अच्छे तैराक को उथले किनारों पर मजा नहीं आता, इसी प्रकार एक सच्चे ज्ञानी को विषय-भोगों में मजा नहीं आता। -8:00 a.m. इस संसार में... 1.        ऐसे कितने लोग हैं, जो उस ईश्वर को पाने के लिए सत्य का आजीवन साथ देने का साहस रखते हैं? 2.        ऐसे कितने लोग हैं, जो उस झूठे ईश्वर को छोड़ सच्चे ईश्वर (परम सत्य) को पाने का संघर्ष करना चाहते हैं? 3.        ऐसे कितने लोग हैं, जो उस परमानन्द (ईश्वर) के लिए अपने भोग-विलास, सुख और सुविधाएं भी छोड़ देने को तैयार हैं? 4.        ऐसे कितने लोग हैं जो सुख-दुखों से मुक्ति हेतु अपने अज्ञान को छोड़ देने को तैयार हैं? 5.        ऐसे कितने लोग हैं जिनमें उस सच्चे ईश्वर को पाने के लिए सब कुछ छोड़ देने का अदम्य साहस है? 6.        ऐसी कितनी माताएं हैं, जो भगवान के नाम पर अपने बेटे का बलिदान दे सकती हैं, जो भगवान क...

परमसत्य की खोज...6 (Discovery of the absolute truth ... 6)

  ( अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...6 7 दिसम्बर 2003 अब मेरे स्वप्न कहते हैं कि तटस्थ रहो, संसार की उलझनों से। इनमे फंसकर व्यर्थ ही अपनी शक्ति व्यय करना निरर्थक है। ये उलझने कभी खत्म नहीं होंगी क्योंकि असत्य, अज्ञान कभी ख़त्म नहीं होगा। इन्हें दूर करने का बस एक उपाय है, लोगों में चेतना और जाग्रति फैलाना, सत्य और ज्ञान की ज्योति जगाना। -8:48 a.m. शक्ति दोषरहित, निर्विकार, उच्चस्तरीय, आत्मबल है, प्रेम उच्च स्तरीय शक्ति है। भक्ति उस अज्ञात शक्ति से डर नहीं, अपनी दुर्बलता और उसकी महानता का गान भी नहीं, बल्कि सरल-हृदयता   है, उच्च स्तरीय प्रेम है। -11:15 a.m. जब भी कोई दुर्बलता तुम्हारे मन को आकर्षित करे, स्वयं से एक ही प्रश्न करो – 'शक्ति और दुर्बलता में से तुम किसे चुनोगे? ये रही शक्ति और वो रही दुर्बलता।' -12:08 p.m. दुःख नहीं, ख़ुशी भी नहीं, रुदन नहीं, हंसी भी नहीं, दुर्बलता नहीं, बंधन नहीं, विकार नहीं, शक्ति का कोई भूचाल भी नहीं, बस एक उदासीनता... नीरसता। मेरे एहसास मरते जा रहे हैं, मेरी अनुभूतियाँ मरती जा रहीं हैं, मेरे विचार मरते जा रहे हैं, य...