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Showing posts from March, 2021

परमसत्य की खोज...13 (Discovery of the absolute truth ... 13)

  ( अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...13 14 दिसम्बर 2003 आदमी अपने अज्ञान में भी इतना खुश रहता है कि अज्ञान (बुराइयों) के ढेर के ऊपर बैठकर भी गर्व महसूस करता है कि मानो उसने एवरेस्ट की ऊंचाई हासिल कर ली हो। -12:50 a.m. लोग अपनी समस्याओं से बचने के लिए, अपनी परेशानियों से भागकर ऐसी कंदरा (गुफा) में जा छिपते हैं जो काल रुपी मगरमच्छ का खुला हुआ मुंह होती है। -7:15 a.m. उच्चतर सत्य एक विस्फोट होता है जिसे जानने के बाद जानने वाला वह नहीं रह जाता, जो वह पहले रहता है, वह पूरी तरह रूपांतरित हो चुका होता है। ब्रह्मचर्य का पालन न करना स्वयं से कपटाचरण करना है, अपनी आत्मा तथा विवेक से छल करना है। -4:15 a.m.   मेरा कॉम्पीटीशन (स्पर्धा) खुद से है और किसी से नहीं। -11:55 a.m. जानवरों और मूर्खों को जब तक प्रताड़ित न किया जाए तब तक वे अपना काम नहीं करते अतः यहाँ गाँधी जी का अहिंसा का सिद्धांत लागू नहीं होता। -12:15 p.m. सच्ची पूजा कृतज्ञता का भाव है उस परमसत्य परमात्मा के प्रति, परन्तु लोगों की पूजा सच्ची कृतज्ञता नहीं बल्कि कृतज्ञता का ढोंग है। जब लोग उस परमशक्ति को ...

परमसत्य की खोज...12 (Discovery of the absolute truth ... 12)

  ( अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...12 13 दिसम्बर 2003 सत्संग बड़े से बड़े दुर्गुण को भी दूर कर देता है। (स्वप्न सन्देश) -7: 05 a.m. अज्ञान से हमेशा दूर रहो, अज्ञान का तनिक सा भी स्पर्श ज्ञान को दूषित कर देता है। मूर्खों को उपदेश देकर अपनी शक्ति व्यय मत करो। अज्ञान केवल स्वयं के ज्ञान से ही ख़त्म हो सकता है, दूसरों के उपदेशों से नहीं। -10:10 a.m. दूसरों के अज्ञान को दूर करने की कोशिश करना बुझी राख पर पेट्रोल छिड़ककर आग जलाने की कोशिश के समान व्यर्थ है। उपदेश का पेट्रोल केवल तभी काम कर सकता है, जब भीतर ज्ञान की अग्नि सुलग उठी हो। -10:15 a.m. आज टॉलस्टॉय ने मुझे तीन गहरे सत्यों से परिचित कराया - १-सबसे महत्त्वपूर्ण समय - जो तुम्हारे सामने है। २- सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति - जो तुम्हारे सामने खड़ा है। ३- सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य - जो तुम कर रहे हो। -12:07 p.m.   प्रलोभनों से बचने का एकमात्र उपाय है - हर दिन, हर घंटे, हर मिनट, हर सेकंड स्वयं को व्यस्त रखो। अपने वर्तमान कार्य को सबसे महत्त्वपूर्ण समझो और उसी में पूरी लगन के साथ जुटे रहो। -6:30 p.m. आज की ...

परमसत्य की खोज...11 (Discovery of the absolute truth ... 11)

  ( अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...11 12 दिसम्बर 2003 विगत रात्रि का स्वप्न - मैं अपने एक मित्र सरदार जी के साथ अपने झोपड़ीनुमा सादे-कच्चे से मकान में एक रस्सी वाली नंगी खाट पर बैठा हूँ और हम खाना खा रहे हैं। सामने पटे पर सूखी रोटी और एक प्लेट में चटनी रखी है। मैं उसे प्रेमपूर्वक और लेने का आग्रह करता हूँ।   सरदार जी ताना मारते हुए कहते हैं -"ओए! ये भी कोई आदमियों का खाना है, चल मेरे साथ मैं बताता हूँ तुझे, आदमियों का खाना कैसा होता है।" मैं कहता हूँ -"भैया, हम गरीबों का खाना तो ऐसा ही होता है, हमें इसी खाने में वो संतोष मिल जाता है जो तुम्हें छप्पन तरह के पकवानों में नहीं मिलता।" सरदार जी कहते हैं -" तू मेरी एक बात बस मान ले, मैं तुझे बेईमान बनने को भी नहीं कह रहा हूँ और न ही कोई गलत काम करने को कह रहा हूँ, बस तू मेरा ये गिफ्ट ले ले। इसमें तो तुझे कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए।" मैं मना करना चाहता हूँ पर वह मेरे मुंह पर हाथ रखकर मुझे रोक देता है और वह गिफ्ट छोड़कर चला जाता है। मैं उसे खोलकर देखता हूँ तो उसमें एक सोने की ईंट रखी हुई मिलती है। उस ...