(अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...28 30 दिसम्बर 2003 न कोई मरता है, न कोई मारता है। दुर्बलता मरती है, शक्ति मारती है। किसी के पतन का कारण कोई दूसरा नहीं, उसकी दुर्बलता है। ये सारा विश्व शक्ति और दुर्बलता का खेल ही तो है। ये सारा संसार शक्ति और दुर्बलता का संघर्ष ही तो है। जीवन-मरण, उत्थान-पतन, यश-अपयश इन सबका कारण शक्ति का उत्थान-पतन ही तो है। एक जगह शक्ति दुर्बलता को दबाती है तो दूसरी जगह वही शक्ति दुर्बलता को उठाकर शक्ति बना देती है। बिलकुल ज्वार भाटे की लहरों की तरह। यदि शक्ति को पाना है तो दुर्बलता से जूझना पड़ेगा, दुर्बलता को मिटाना पड़ेगा। -7:18 A.M. मुझे मालूम है, हर लड़ाई का फैसला मेरे हक़ में ही होगा। मैं जानता हूँ कि हर लड़ाई में जीत मेरी ही होगी क्योंकि मैं शक्ति हूँ, मैं शक्ति हूँ सत्य की। -7:22 A.M. मुझे कोई नहीं मार सकता, मैं अमर हूँ क्योंकि मैं शक्ति हूँ, मैं शक्ति हूँ सत्य की। -7:30 A.M. मुझे गर्व है अपनी शक्ति पर कि मैं गीता को जी रहा हूँ। गीता कमजोरों का धर्मग्रन्थ नहीं, साहसी योद्धाओं का धर्मग्रन्थ है। इसे कमजोर लोग नहीं समझ सकते। इसे ...
It is a little lamp of truth, which is giving dim light of truth but it has thousands of suns inside it...