( अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...17 18 दिसम्बर 2003 प्रकृति के नियमों का अतिक्रमण करके ही मानव अतिमानव बनता है। आरम्भ में उसे इसके लिए प्रकृति से संघर्ष करना पड़ता है, पर बाद में प्रकृति भी उसका साथ देने लगती है। -8:10 a.m. ईश्वर (परमसत्य) इतना जटिल नहीं है जितना धार्मिक लाल-बुझक्कड़ों ने इसे बना दिया है। -9:20 a.m. 'हम जानते हैं!' या 'हमें मालूम है!' यह सोचकर हम बहुत सी छोटी-छोटी बातों की उपेक्षा कर उन्हें दिमाग से निकाल देते हैं जबकि यही बातें हमारे चरित्र गठन तथा हमारी सफलता के लिए महत्त्वपूर्ण होती हैं। -10:00 a.m. सत्य का साथ वहां तक देने में सबको ख़ुशी होती है, जहाँ तक कोई कष्ट न हो। -10:55 a.m. सत्य का आकर्षण दुनिया का सबसे तीव्र आकर्षण है बशर्ते आपके अंदर असली फौलाद (ईमानदारी) हो। -12:55 p.m. स्वयं को माया में फंसा कर, भ्रम में उलझाकर सत्य की खोज कैसे की जा सकती है? सत्य की खोज इसलिए दूभर हो गई है क्योंकि लोग माया के आकर्षण से खुद को बचा नहीं पाते और इसमें उलझकर सत्य से निरंतर दूर होते जाते हैं। सत्य की खोज केवल वे ही कर सकते हैं...
It is a little lamp of truth, which is giving dim light of truth but it has thousands of suns inside it...