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Showing posts from 2020

परमसत्य की खोज...8 (Discovery of the absolute truth ... 8)

  ( अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...8 9 दिसम्बर 2003 जिज्ञासा अर्जुन है, शक्ति कृष्ण, सत्य साहस। दोष-विकार तथा दुर्बलताएँ कौरव सेना हैं तथा जीवन महाभारत। जीवन एक युद्ध है, एक महासंग्राम है, सत्य तथा भ्रम के बीच, शक्ति तथा दुर्बलता के बीच। जब जीवन से सारे दोष विकार तथा दुर्बलताएँ भाग जाएंगी या मारी जाएंगी तब केवल सत्य बचा रहेगा, तब केवल शक्ति बची रहेगी। -8:17 a.m. यह संसार एक रेलवे स्टेशन है। जिस तरह ट्रेन के आने पर स्टेशन पर बहुत सी भीड़ जमा हो जाती है पर किसी को किसी से मतलब नहीं होता, सब अपना-अपना सामन बटोर कर अपने-अपने घर जाने की तैयारी में व्यस्त रहते हैं। इस समय भीड़ का किसी को भी आभास नहीं होता और सब भीड़ में होते हुए भी अकेले चलते हैं। उसी तरह मैं भी इस संसार में चल रहा हूँ। अब मुझे संसार की भीड़ विचलित नहीं कर पा रही है। क्योंकि मुझे अपने घर जाने की जल्दी है। -10:10   a.m. मन मुझे बार-बार वापिस लौट जाने को कह रहा है, संसार के प्रलोभन दिखा रहा है लेकिन शायद इसने मुझे अभी तक जाना नहीं है, मेरी शक्तियों को पहचाना नहीं है। मैं संसार के प्रलोभन के पीछे छिपे उस ज...

परमसत्य की खोज...7 (Discovery of the absolute truth ... 7)

  ( अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...7 8 दिसम्बर 2003 एक अच्छे तैराक को उथले किनारों पर मजा नहीं आता, इसी प्रकार एक सच्चे ज्ञानी को विषय-भोगों में मजा नहीं आता। -8:00 a.m. इस संसार में... 1.        ऐसे कितने लोग हैं, जो उस ईश्वर को पाने के लिए सत्य का आजीवन साथ देने का साहस रखते हैं? 2.        ऐसे कितने लोग हैं, जो उस झूठे ईश्वर को छोड़ सच्चे ईश्वर (परम सत्य) को पाने का संघर्ष करना चाहते हैं? 3.        ऐसे कितने लोग हैं, जो उस परमानन्द (ईश्वर) के लिए अपने भोग-विलास, सुख और सुविधाएं भी छोड़ देने को तैयार हैं? 4.        ऐसे कितने लोग हैं जो सुख-दुखों से मुक्ति हेतु अपने अज्ञान को छोड़ देने को तैयार हैं? 5.        ऐसे कितने लोग हैं जिनमें उस सच्चे ईश्वर को पाने के लिए सब कुछ छोड़ देने का अदम्य साहस है? 6.        ऐसी कितनी माताएं हैं, जो भगवान के नाम पर अपने बेटे का बलिदान दे सकती हैं, जो भगवान क...

परमसत्य की खोज...6 (Discovery of the absolute truth ... 6)

  ( अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...6 7 दिसम्बर 2003 अब मेरे स्वप्न कहते हैं कि तटस्थ रहो, संसार की उलझनों से। इनमे फंसकर व्यर्थ ही अपनी शक्ति व्यय करना निरर्थक है। ये उलझने कभी खत्म नहीं होंगी क्योंकि असत्य, अज्ञान कभी ख़त्म नहीं होगा। इन्हें दूर करने का बस एक उपाय है, लोगों में चेतना और जाग्रति फैलाना, सत्य और ज्ञान की ज्योति जगाना। -8:48 a.m. शक्ति दोषरहित, निर्विकार, उच्चस्तरीय, आत्मबल है, प्रेम उच्च स्तरीय शक्ति है। भक्ति उस अज्ञात शक्ति से डर नहीं, अपनी दुर्बलता और उसकी महानता का गान भी नहीं, बल्कि सरल-हृदयता   है, उच्च स्तरीय प्रेम है। -11:15 a.m. जब भी कोई दुर्बलता तुम्हारे मन को आकर्षित करे, स्वयं से एक ही प्रश्न करो – 'शक्ति और दुर्बलता में से तुम किसे चुनोगे? ये रही शक्ति और वो रही दुर्बलता।' -12:08 p.m. दुःख नहीं, ख़ुशी भी नहीं, रुदन नहीं, हंसी भी नहीं, दुर्बलता नहीं, बंधन नहीं, विकार नहीं, शक्ति का कोई भूचाल भी नहीं, बस एक उदासीनता... नीरसता। मेरे एहसास मरते जा रहे हैं, मेरी अनुभूतियाँ मरती जा रहीं हैं, मेरे विचार मरते जा रहे हैं, य...

परमसत्य की खोज...5 (Discovery of the absolute truth ... 5)

  ( अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...5 6 दिसम्बर 2003 कुछ दिनों पहले मैं अपने ही बनाए हुए बंधनों में बंधा कुत्ता था और भौंकने को ही अपनी असली शक्ति समझ रहा था। अब मैं जंगल में आजाद घूमता हुआ शेर हूँ, अब शक्ति मुझमे प्रत्यक्ष है। -११:०७ p.m. अब मैं विकार शून्य हो गया हूँ। -८:१० a.m. सत्य हमें कड़वा लगता है, ह्रदय में शूल की भांति चुभता है, क्यों? क्योंकि हम इतने दुर्बल हैं कि अपनी दुर्बलता का सत्य भी स्वीकार नहीं कर सकते। हममें इतनी भी शक्ति नहीं की अपनी अशक्ति को अपना सकें अपनी दुर्बलता के सत्य को अपना सकें। -८:१३ a.m. क्या तुम नहीं चाहते सिंह जैसी निर्भयता ? शक्ति की प्रचंडता, अपने भीतर ? यदि चाहते हो तो तुम्हे भी सत्य की खोज को अपनाना पड़ेगा। -८:१५ a.m. कुछ दिन पहले मैं ज़िंदगी के पीछे भाग रहा था, अब ज़िंदगी मेरे पीछे भाग रही है। -८:२२ a.m. स्वयं को आदेश दो, स्वयं को उपदेश दो। यदि तुम अपने उद्देश्य को कभी भी न भूलो तो दुनिया की कोई बाधा तुम्हे तुम्हारे मार्ग से विचलित नहीं कर सकती। दुनिया की कोई ताकत तुम्हे तुम्हारे लक्ष्य तक पहुँचने से नहीं रोक सकती। ...

परमसत्य की खोज...4 (Discovery of the absolute truth ... 4)

  ( अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...4 5 दिसम्बर २००३ लोगों का अज्ञान ही उन्हें ज्ञान को स्वीकारने नहीं देता और स्वयं को ज्ञान तथा सच्चे ज्ञान को अज्ञान साबित करने की कोशिश करता है। अब मैं मस्तिष्क की अतीन्द्रिय क्षमताओं से परिचित होने लगा हूँ। सचमुच ब्रह्मचर्य में बहुत बड़ी ताकत है। स्वप्नों में डर होता है, दर्द नहीं। सुख होता है, स्वाद नहीं, रस नहीं। जीवन में अब न कोई खुशी है, न दुःख, बस एक रहस्य... जीवन का रहस्य। -८:०० a.m. ये जीवन, वो मृत्यु, ये जाग्रति, वो निद्रा... ये वास्तविकता, वो स्वप्न... सब कुछ एक जादू है, रहस्य है। ये दिन, वो रात, ये आनंद, वो रुदन, ये धूप, वो छांव... सब कुछ एक जादू है, एक रहस्य है। सचमुच प्रकृति एक जादू भवन है। -८:४७ a.m. अब संसार अनोखा लगता है, बिल्कुल परियों की कहानी जैसा। -९:२० a.m. मन का पीछा मत करो, वह जहाँ भी जाना चाहे, उसे जाने दो और तटस्थ होकर दूर से देखते रहो, कुछ देर बाद खुद को अकेला पाकर वह खुद ही किसी बच्चे की तरह तुम्हारे पास लौट आएगा। -९:३० a.m. मैं आगे बढ़ रहा हूँ या पीछे लौट रहा हूँ। -९:३७ a.m. का...