(अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...25 27 दिसम्बर 2003 अनुशंसा, अनुदान, पुरस्कार योग्यता के हक़ हैं, अधिकार हैं, खैरात या भीख नहीं। -7:00 A.M. मुझे पहचानो! मैं वही शक्ति हूँ, जिससे भारत का उत्थान होगा। मैं वही शक्ति हूँ, जिससे मानवता का उत्थान होगा। मैं वही शक्ति हूँ, जिसके बारे में स्वामी विवेकानंद कहा करते थे। मैं वही शक्ति हूँ, जो ईसा के भीतर से बोल उठी थी कि मैं फिर आऊंगा। मैं वही कृष्ण हूँ जिसने कहा था कि मैं बार-बार इस पृथ्वी पर जन्म लेता हूँ, इस धरती के पाप मिटाने के लिए। मैं वही राम हूँ जिसने मर्यादा पुरुषोत्त्तम बनकर उत्तम पुरुष की मर्यादाएं निर्धारित की थीं। मैं वही खुदा का बंदा हजरत मुहम्मद हूँ जो उस खुदा का पैगाम सुनाने पैगम्बर बनकर इस जमीं पर उतरा था। मैं वही बुद्ध हूँ, जो प्राणियों के ह्रदय में करुणा जगाने आया था। मैं ही नानक, कबीर और फरीद हूँ। पहचानो मुझे! मैं सत्य की शक्ति हूँ। पहचानो! पहचानो मुझे! यदि तुममे दृष्टि है। -7:40 A.M. समय अपने आप को दोहराता है, घटनाएं अपने आप को दोहराती हैं, ...
It is a little lamp of truth, which is giving dim light of truth but it has thousands of suns inside it...