( अंतर्यात्रा) सत्य की खोज... 12 26 नवंबर २००३ अकेलापन...! इतना अकेलापन है इस मार्ग में कि तुम्हारी अपनी ही आवाज़ तुम्हे डरा देगी, तुम्हारी परछाई तुम्हे किसी और का आभास देगी, तुम्हारे अंदर कोई और नजर आएगा। -८:०० a.m. चलते चलते अचानक मेरे मन में प्रश्न उठता है कि कहीं मैं गलत दिशा में तो नहीं जा रहा हूँ, और फिर मैं अपने आप से पूछता हूँ कि कहीं मैं भटक तो नहीं रहा, तभी अंदर शक्तियों का एक भूचाल उठता है और ये शक्तियां कहतीं हैं - तुम्हें हम पर भी विश्वास नहीं? प्रतिदिन हमारा बढ़ता आकार क्या तुम्हे ये विश्वास नहीं दिलाता कि तुम सही जा रहे हो? मैं कहता हूँ - 'नहीं, अब मुझे कोई नहीं बहला सकता, उस तीसरी शक्ति के सिवा, तुम भी नहीं, मेरा धैर्य टूटता जा रहा है।' -८:४० a.m. दर्पण में प्रतिबिम्ब देखना भी आत्म-अवलोकन है जो मुझमे आत्मविश्वास भरता है, जो मुझे दिखाता है कि मैं सतत परिवर्तित होता जा रहा हूँ। शक्ति मेरी आँखों में चमक रही है, मेरे चेहरे से झलक रही है, मेरी चाल में झलक रही है। -८:५० a.m. वर्तमान घटनाएं लंबी श्रृंखला है पूर्व में घटित हुई घटन...
It is a little lamp of truth, which is giving dim light of truth but it has thousands of suns inside it...