(अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...28 30 दिसम्बर 2003 न कोई मरता है, न कोई मारता है। दुर्बलता मरती है, शक्ति मारती है। किसी के पतन का कारण कोई दूसरा नहीं, उसकी दुर्बलता है। ये सारा विश्व शक्ति और दुर्बलता का खेल ही तो है। ये सारा संसार शक्ति और दुर्बलता का संघर्ष ही तो है। जीवन-मरण, उत्थान-पतन, यश-अपयश इन सबका कारण शक्ति का उत्थान-पतन ही तो है। एक जगह शक्ति दुर्बलता को दबाती है तो दूसरी जगह वही शक्ति दुर्बलता को उठाकर शक्ति बना देती है। बिलकुल ज्वार भाटे की लहरों की तरह। यदि शक्ति को पाना है तो दुर्बलता से जूझना पड़ेगा, दुर्बलता को मिटाना पड़ेगा। -7:18 A.M. मुझे मालूम है, हर लड़ाई का फैसला मेरे हक़ में ही होगा। मैं जानता हूँ कि हर लड़ाई में जीत मेरी ही होगी क्योंकि मैं शक्ति हूँ, मैं शक्ति हूँ सत्य की। -7:22 A.M. मुझे कोई नहीं मार सकता, मैं अमर हूँ क्योंकि मैं शक्ति हूँ, मैं शक्ति हूँ सत्य की। -7:30 A.M. मुझे गर्व है अपनी शक्ति पर कि मैं गीता को जी रहा हूँ। गीता कमजोरों का धर्मग्रन्थ नहीं, साहसी योद्धाओं का धर्मग्रन्थ है। इसे कमजोर लोग नहीं समझ सकते। इसे ...
(अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...27 29 दिसम्बर 2003 इस संसार में ऐसी कोई चीज नहीं, जो व्यर्थ हो। -9:00 A.M. मैंने जान लिया कि ये जीवन एक भ्रम है, एक सपना है, तो सपने पर क्या खुश होना और क्या दुखी होना। सपने में क्या लाभ और क्या हानि। सपने पर कैसा राग और कैसा द्वेष। कैसा शोक, कैसी व्याकुलता। तो फिर सपने पर मैं क्यों रोऊँ। क्यों क्रोधित होऊं। क्यों दुखी होऊं। हाँ, आनंदित जरूर हो सकता हूँ। -9:10 A.M. मैंने जान लिया कि मृत्यु क्या है? मैंने जान लिया मृत्यु का रहस्य। मृत्यु एक अवस्था है, एक स्वप्न के टूटने से दूसरे स्वप्न के शुरू होने के बीच की। अवस्था है एक जीवन के अंत तथा दूसरे जीवन के आरम्भ के बीच की। पर मेरे लिए मृत्यु होगी स्वप्न के टूटने के बाद जागने की अवस्था। पूर्ण जाग्रति। मेरे लिए मृत्यु अवस्था होगी जीवन के अंत के बाद परम जीवन में प्रवेश की। मेरे लिए मृत्यु अवस्था होगी मेरी शक्ति की परम शक्ति में विलय की। मेरे लिए मृत्यु अवस्था होगी पूर्ण मुक्ति की, पूर्ण आनंद की, परम आनंद की। मेरी मृत्यु मेरे लिए एक उत्सव होगी, एक महा उत्सव। -9:50 A.M. प...