अंतर्प्रेरणा... पूर्णता एक शब्द है, एक मापदंड के लिए, लेकिन वास्तव में पूर्णता की स्थिति कभी प्राप्त नहीं की जा सकती। जिसे हम एक मापदंड के लिए पूर्णता कहते हैं, दूसरे बड़े मापदंड पर वह अपूर्ण सिद्ध होती है। जिस प्रकार एक गिलास में पानी पूरा भरा हुआ है और उस पानी को किसी बड़े जार में डाल दिया जाए तो जार अपूर्ण सिद्ध होगा अतः पानी कभी पूर्ण या अपूर्ण नहीं नहीं होता, केवल मापदंड पूर्ण-अपूर्ण हो सकते हैं। ठीक इसी प्रकार ज्ञान कभी पूर्ण नहीं हो सकता। जो यह कहते हैं कि मुझे इस विषय में पूर्ण ज्ञान है वे मूर्ख ये नहीं जानते कि मस्तिष्क का मापदंड बहुत स्थूल है इसलिए कोई भी किसी भी विषय में पूर्ण ज्ञानी नहीं हो सकता, ज्ञान तो अथाह है। केवल वह दूसरों के मापदंड से कम या ज्यादा हो सकता है... मेरा लक्ष्य... ज़िंदगी की राह पर चलते-चलते लगता है कि अपने-आप ही राहें आसान होती जा रही हैं लेकिन जैसा कि मानव स्वभाव है कि हर मंज़िल को वह केवल एक पड़ाव ही समझता है, उसी तरह मैं भी अपनी ज़िंदगी की छोटी-बड़ी सफलताओं को पड़ाव ही समझता हूँ... एक-एक करके हर रात गुजरती जाती है और सपनों की कड़ियों में ए...
It is a little lamp of truth, which is giving dim light of truth but it has thousands of suns inside it...