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Showing posts from August, 2020

सत्य की खोज...17 (Discovery of the truth...17)

  ( अंतर्यात्रा) सत्य की खोज... 17 1 दिसम्बर २००३   रात भर मेरे भीतर की सकारात्मक ऊर्जा, नकारात्मक ऊर्जा से लड़ती रही और कड़े संघर्षों के बाद सकारात्मक ऊर्जा ने नकारात्मक ऊर्जा को परास्त कर दिया, काम के प्रबल आक्रमण को भी परास्त कर दिया। रात भर मैं शक्तियों के प्रहारों से व्याकुल हो करवटें बदलता रहा। -३:५० a.m.   अब मन मेरे आदेश मानने लगा है। -९:०७ a.m. मेरी सारी ऊर्जा नाभि पर केंद्रित हो रही है। यह ऊर्जा मुझे उष्णता और स्पंदन का बोध करा रही है।   -११:४६ a.m.   ज्योति तुम, प्रकाश तुम पृथ्वी तुम, आकाश तुम। दिग्दिगंत में हो तुम, कूल और कछार तुम, शून्य से उपज रहे समग्र ये विचार तुम। सूर्य तुम हो चंद्र तुम, कण में सूक्ष्म रंध्र तुम। शब्द तुम हो अर्थ तुम, शून्य तुम समर्थ तुम। शून्य में अनंत तुम, जीव में जीवंत तुम। पाश तुम हो मुक्ति तुम, लोभ तुम विरक्ति तुम। दृष्टि तुम हो, सृष्टि तुम, व्यष्टि में समष्टि तुम। स्वप्न तुम यथार्थ तुम, कृत्य तुम कृतार्थ तुम। शक्ति तुम, शक्ति तुम, शक्ति तुम वो शक्ति तुम। शक्ति और दुर्बलता...

सत्य की खोज...16 (Discovery of the truth...16)

  ( अंतर्यात्रा) सत्य की खोज... 16 30 नवंबर २००३   नाली के कीड़े को बलपूर्वक नाली से निकालकर अच्छी साफ़-सुथरी जगह रखोगे तो उसका दम घुटेगा। नाली का मोह उससे तब तक नहीं छूटेगा जब तक कि उसकी समझ उस स्तर तक न पहुँच जाए कि नाली की दुर्गन्ध और सुगंध में से श्रेष्ठता का चयन कर सके, गन्दगी और मखमल में से श्रेष्ठता का वरण कर सके। -९:०५ a.m. किसी व्यक्ति में निद्रा का बाहुल्य (प्रमाद) यह बताता है कि उसमे सकारात्मक ऊर्जा (पॉजिटिव एनर्जी) की कमी है।   ९:१० a.m. जिस दिन तुम अपने दिल की बादशाहत कबूल कर लोगे उस दिन से तुम्हे ये दुनियादारी फकीरी लगने लगेगी। मुझे अपने दिल की सल्तनत मिल चुकी है। आदमी इस दुनिया के नाटक के अभिनय करने में इस कदर डूब जाता है कि अपना वास्तविक स्वरुप ही भूल जाता है और उस झूठे पात्र को ही अपना स्वरुप समझने लगता है। इस अभिनय के कारण वह नैसर्गिक सौन्दर्य से दूर हो जाता है और उस नकली सौन्दर्य में ही आनंद तलाशने लगता है। पर आप ही बताइये, भला कागज़ के फूलों से कहीं सच्चे फूलों की खुशबू और ताजगी मिल सकती है? -९:४५ a.m. सच्ची निर्दोषता न तो सुख जानती...

सत्य की खोज...15 (Discovery of the truth...15)

  ( अंतर्यात्रा) सत्य की खोज... 15 29 नवंबर २००३   कागज पर कलम की सहायता से निर्णय करना सबसे सरल उपाय है अपनी दुविधा के गणित को हल करने का। -१२:२५ a.m.   डायरी लेखन ने ही मुझे इतनी शीघ्रता से मेरी सफलता का आभास कराया है। लेखन ने ही मेरी वैचारिक प्रगति को प्रखर और तीव्रगामी बनाया है। आत्म प्रगति का मुझ जैसी साधारण बुद्धि मानव के लिए इससे अच्छा उपाय और कोई नहीं है। -१२:२८ a.m. अपमान का आहत भाव तुरंत प्रतिशोध का मार्ग तलाशने में जुट जाता है। -12:32 a.m.   हर बार किसी की गलतियों को सहन करने पर उसकी गलती का खामियाजा खुद को भुगतना पड़ता है। -१२:५२ a.m. मुसीबतों के पर्वतारोहण में बार बार स्खलन तो होगा ही, जितनी बार हम स्खलित होंगे, उतनी बार ही ऊपर चढ़ने की कोशिश करनी होगी। नहीं तो नीचे ही कब्र बन जाएगी दुर्बलताओं की। -१२:५८ a.m. मुसीबतों का शुक्रिया अदा करो, विपत्तियों को धन्यवाद दो, जिन्होंने तुम्हारे साहस, शक्ति तथा आत्मबल को हर बार बढ़ाया है, आत्मविश्वास और आत्मगौरव को बढ़ाया है। -१:१० a.m. किसी और की समीक्षा में समय व्यर्थ न करो, स्वयं की खोज जा...

सत्य की खोज...14 (Discovery of the truth...14)

  ( अंतर्यात्रा) सत्य की खोज... 14 28 नवंबर २००३   रातों को नकारात्मक शक्तियां अधिक प्रभावी हो जाती हैं किन्तु मेरी सकारात्मक शक्तियां इन्हें परास्त कर देतीं हैं।  -८:४५ a.m. मुझे अब इस संसार में और उलझने की आवश्यकता नहीं रही क्योंकि मैं जान चुका हूँ कि सत्य क्या है और स्वप्न क्या है ? -८:५० a.m. लोगों का अज्ञान ही बुराइयों को पोषित किये हुए है। -८:५२ a.m. मैं सुन रहा हूँ, हवाओं का गर्जन, वाहनों की गड़गड़ाहट, पंछियों की चहचहाहट का मधुरिम संगीत, जो एक ही बात कह रहे हैं कि 'शक्ति ही सत्य है।' -९:०७ a.m. पत्नी के आ जाने पर एक व्यक्ति के जीवन मे उसकी माता का महत्त्व कम हो जाता है, पत्नी के आगे माता की प्राथमिकता द्वितीयक हो जाती है, पत्नी के आ जाने पर माता से लगाव कम हो जाता है, क्यों? क्योंकि व्यक्ति के जीवन में माता प्रश्न उत्पन्न करती है और पत्नी उत्तर। वह पत्नी सूक्ष्म रूप में उसी शक्ति का साक्षात्कार कराती है। पत्नी से मिलन के पश्चात व्यक्ति की शक्ति द्विगुणित हो जाती है, परंतु मैं तो अपनी शक्ति को अनंत गुणित करना चाहता हूँ, परमशक्ति से मिलकर। -९:३...