(अंतर्यात्रा)
परमसत्य की खोज...8
9 दिसम्बर 2003
जिज्ञासा अर्जुन
है, शक्ति कृष्ण, सत्य साहस। दोष-विकार तथा दुर्बलताएँ कौरव सेना हैं तथा जीवन
महाभारत।
जीवन एक युद्ध
है, एक महासंग्राम है, सत्य तथा भ्रम के बीच, शक्ति तथा दुर्बलता के बीच। जब जीवन
से सारे दोष विकार तथा दुर्बलताएँ भाग जाएंगी या मारी जाएंगी तब केवल सत्य बचा
रहेगा, तब केवल शक्ति बची रहेगी।
-8:17 a.m.
यह संसार एक
रेलवे स्टेशन है। जिस तरह ट्रेन के आने पर स्टेशन पर बहुत सी भीड़ जमा हो जाती है
पर किसी को किसी से मतलब नहीं होता, सब अपना-अपना सामन बटोर कर अपने-अपने घर जाने
की तैयारी में व्यस्त रहते हैं। इस समय भीड़ का किसी को भी आभास नहीं होता और सब
भीड़ में होते हुए भी अकेले चलते हैं। उसी तरह मैं भी इस संसार में चल रहा हूँ। अब
मुझे संसार की भीड़ विचलित नहीं कर पा रही है। क्योंकि मुझे अपने घर जाने की जल्दी
है।
-10:10 a.m.
मन मुझे बार-बार
वापिस लौट जाने को कह रहा है, संसार के प्रलोभन दिखा रहा है लेकिन शायद इसने मुझे
अभी तक जाना नहीं है, मेरी शक्तियों को पहचाना नहीं है। मैं संसार के प्रलोभन के
पीछे छिपे उस जाल को देख पा रहा हूँ, जिसे मेरा मन नहीं देख पा रहा है।
मन, जो पहले बंधन
में बंधा छटपटा रहा था, अब शायद स्वतंत्रता से ऊब गया है। मैं जानता हूँ, मन हठीला
बालक है, मैं इसे मना लूँगा। ये अपने बालहठ में छिपे अनर्थ को नहीं देख पा रहा है
मगर मैं देख पा रहा हूँ। ये अभी तो ललचा रहा है, मगर वहां जाकर पछताएगा। मेरा
वर्तमान कर्तव्य प्रलोभन से संघर्ष ही है।
-1:17 p.m.
सत्य से बड़ा तप
और कोई नहीं।
-2:00 p.m.
झूठ बोलने का
नुकसान किसी और को हो न हो, बोलने वाले को तुरंत होता है। उसके आचरण की शक्ति
कमजोर हो जाती है, उसका आत्मबल, आत्मविश्वास कमजोर हो जाता है, उसका नैतिक बल
कमजोर हो जाता है। कुल मिलाकर उसका आंशिक पतन हो जाता है।
-2:02 p.m.
Adventure of the Truth…
Discovery of the absolute truth ... 8
December
9, 2003
Curiosity is Arjuna, power is Krishna and truth is courage. Demerits, disorders and weaknesses are the Kaurava army and life is Mahabharata.
Life is a war, a great war, between truth
and illusion, between strength and weakness. When all faults and weaknesses
will run away from life or die then only truth will survive, then only strength
will survive.
-8:17 a.m.
This world is a railway station. As the
train arrives, much crowd gathers at the station but nobody makes any senses to
anyone, all are busy in preparing their own luggage and preparing to go home. At
this time no one experience the crowd and all go alone in the crowd. In the
same way I am also moving in this world. Now the crowd of the world is unable
to disturb me because I'm in hurry to go home.
-10:10
a.m.
-1:17 p.m.
There is no bigger penance than truth.
-2:00 p.m.
-2:02 p.m.
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