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सत्य की खोज...18 (Discovery of the truth...18)

(अंतर्यात्रा)

सत्य की खोज...18

2 दिसम्बर २००३

अब मैं अनुभव कर रहा हूँ कि राम भी मैं ही था, कृष्ण भी मैं ही था, बुद्ध भी मैं ही था, ईसा भी मैं ही था, महावीर भी मैं ही था, मुहम्मद भी मैं ही था, विवेकानंद भी मैं ही था, ओशो भी मैं ही था।

मैं ही तो था इन सब में क्योंकि मैं शक्ति हूँ सत्य की।

कहीं मेरी बातों में आकर मुझे भी इन्ही लोगों की तरह पूजने मत लग जाना, नहीं तो मेरी सत्य की खोज का बंटाढार हो जाएगा।

अगर मेरी बातों में विश्वास है तो अपने अंदर जगा कर देखना इन सबको। मैं उतने ही आत्मविश्वास से कह रहा हूँ कि आप भी वही हैं, पर मैं जान चुका हूँ और आप अनभिज्ञ हैं। यदि जानना चाहते हैं तो शुरू कर दीजिये 'सत्य की खोज'।

-१२:१५ a.m.

सभी धर्म सत्य से ही शुरू हुए हैं किन्तु इतनी सदियों से लोग चलते-चलते भटक गए हैं इन रास्तों पर, इसलिए मैं आया हूँ रास्ता दिखाने। 

लोग इन रास्तों पर चलने की बजाय इन्हें सिन्दूर, अगरबत्ती लगाकर पूज रहे हैं, नारियल फोड़कर प्रसाद चढ़ा रहे हैं कि परमात्मा इस रास्ते से चलकर इनके पास आ जाए पर न तो रास्ते चलते हैं और न ही वो परमात्मा। चलना तो लोगों को ही पड़ेगा उस परमात्मा को पाने के लिए। नास्तिकता मेरा भ्रम था। नास्तिकता के पहले की आस्तिकता भी आस्तिकता का भ्रम थी। सभी लोगों की आस्तिकता आस्तिकता का भ्रम ही है। सही मायने में आस्तिक मैं आज हुआ हूँ। आज मेरी सत्य की खोज का एक चरण पूर्ण हुआ। अब दूसरा चरण शुरू होता है, उस परम सत्य की खोज का, परम शक्ति से मिलन का।

-१२:४५ a.m. 

Adventure of the Truth…

Discovery of the truth...18

December 2, 2003, Tue,

Now I am realizing that I was the Ram, I was the krishna, I was the buddha, I was the Jesus, I was the Mahavira, I was the Muhammad, I was the Vivekananda, I was the Osho.

It was me in these all, because I am the power of truth. Don’t start to worship me coming to my words; otherwise it will ruin my discovery of truth.

If you believe what I say, then awake them all inside. The more confident I am saying that you are the same, but I have known and you are ignorant. If you want to know, then start the "discovery of the truth".

-12:15 a.m.

All religions are true at the beginning but people have deviated by walking for centuries on those ways, so I've come to show the way.

Instead of walking on these paths, people are applying vermilion on them, they are worshipping them by incense and they are offering coconuts so that God may come to them by those ways but neither the ways walk nor the God. Then people will have to walk to get the divine. Atheism was my confusion. Theism before the atheism was also an illusion of theism. Also, theism of all the people is the confusion of the theism. Today I am truly a theist. Today I have completed a phase of discovery of the truth. Now the second phase - discovery of the absolute truth, meeting the absolute strength, begins.

-12:45 a.m.


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