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बीते हुए दिन... (Days gone by...)


(प्रिय मित्रों,
अब आप मेरे जीवन की घटनाओं को सिलसिलेवार पढ़ेंगे। सुविधा के लिए मैं आवश्यकतानुसार घटनाक्रम का दिनांक तथा समय के साथ उल्लेख कर रहा हूँ। आशा है मेरे इस प्रयास से आप लाभान्वित होंगे। तो आइये, सत्य के मार्ग की इस अद्भुत अद्वितीय यात्रा का आनंद लेते हैं... )
 व्यक्ति क्या है यह अधिक महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि वह वैसा क्यों है...
-३१ अप्रैल १९९६

बीते हुए दिन... 
'बचपन', कितना खूबसूरत है यह शब्द...
और इतनी ही खूबसूरत है इससे जुडी यादें। ऐसा कोई नहीं जिसने इस अनुभव को प्राप्त किया हो। ऐसा कोई नहीं जिसने अपनी जिंदगी में इसकी खट्टी-मीठी यादें चखीं हों। खैर, दूसरों के अनुभव के बारे में तो मैं नहीं कह सकता लेकिन अपने अनुभवों को याद करके आज भी मन लालायित हो उठता है उन क्षणों को पुनः पाने के लिए...
बचपन नाम ही अनजानेपन और भोलेपन का है। निश्छलता और निर्दोषता की  इस अवस्था में सच-झूठ, बुरा-भला, पाप-पुण्य कुछ नहीं होता, बस अपनी एक हठ होती है और अपना एक छोटा सा स्वच्छंद मन, जो कल्पनाओं के पंख लगाकर खुले आकाश में उड़ता रहता है और इसकी झूठी और गैर-तार्किक कल्पनाएं भी इतनी खूबसूरत होती हैं कि हर चीज को अपने रंग-ढंग में ढालकर उसकी कल्पना करना किसी अलौकिक दिव्य भावों की अनुभूति से कम नहीं होता।
संसार की हर भौगोलिक-प्राकृतिक और भौतिक वस्तुओं को देखकर मन जो कहानियां गढ़ता है, उन्हें मैं फिर से महसूस करना चाहता हूँ, लेकिन अफ़सोस कि  इन अनुभवों का किसी किताब या आधुनिक साधनों में समावेशित होना संभव नहीं है... 
 -२८ अप्रैल १९९६

(Hi friends ...
Now you will read the events of my life chronologically.
For the convenience I am mentioning the date and time as required...
Let’s enjoy the truth...)

What is a Person, It is not so important than that why he is so...
-10 April 1996

Days gone by...

‘Childhood’, how beautiful is this word...
 And even more beautiful are the memories associated with it. There is no one who has not lived the experience. There is no one who has not tasted its sweet and sour experiences in his life.
Well...  I can’t say about others but when I remember those moments, the heart becomes tempted to get back those moments. Childhood is the name of Innocence and naivety. There is neither truth nor lie, neither good nor bad in this stage. There is simply own persistence and a little wayward mind which flies in the open sky spreading the wings of thoughts and its false and non-logical fantasies are so beautiful that putting everything in its own color and way to its imagination is not less than a supernatural feelings.
By seeing every geographic-natural and material things of the world mind frames which stories, I wish to feel them again but alas! It is not possible to include these feelings in any book or any media...   
-28 April 1996

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