Skip to main content

मैं और मेरी तन्हाई (LONLINESS)


मैं और मेरी तन्हाई...
आज के योगी की आत्मकथा (भाग-१)

पाठकों से...
जब मेरी तन्हाई बोलती है तो मेरे कहने को कुछ भी नहीं रह जाता, अगर हम ईमानदारी से सुनें तो तन्हाई हमारी आत्मा की आवाज है, बस इसे सुनें और आगे बढ़ें तो मैं समझता हूँ कि फिर संसार में किसी और गुरु की आवश्यकता नहीं रह जाती, फिर हमारा ह्रदय ही हमारा प्रेरणा स्त्रोत बन जाता है. इसलिए मैं मानता हूँ कि मेरा कोई और गुरु नहीं है मेरी तन्हाई के सिवा।  अगर हमारे ह्रदय के द्वार खुल जाएँ तो फिर हमें आत्मा की यात्रा में गतिशील होने से कोई नहीं रोक सकता, जब यह बात मेरी समझ में आई तो मेरी अंतर्यात्रा आप ही आप शुरू हो गई।  मेरी यह प्रेरणा आपकी भी अंतर्यात्रा की प्रेरणा बन जाये यही मेरे इस जीवन का लक्ष्य है...
मुझे प्रेरित करने वाले कुछ वाक्य...
अप्प दीपो भव ( अपने दीपक खुद बनो )...                  
-गौतम बुद्ध
सिर्फ एक विचार सारे संसार में उजाला फैला सकता है...     
-अज्ञात
जिंदगी भर धुआं देते रहने से बेहतर है, एक बार चमक कर बुझ जाना...    
-महाभारत
दुनिया की हर राह किसी किसी मुसाफिर की ठोकर ने ही बनाई है...     
-शरतचन्द्र (श्रीकांत में)    
अगर तुम मुझे समस्याओं से रहित एक भी व्यक्ति दिखा सको तो मैं तुम्हें समस्याओं से रहित संसार दिखा दूंगा...    
-आर. के. नारायण (गाइड में)
ईश्वर ने मनुष्य को दो हाथ दिए और सृजन करने की शक्ति दी पर वह इनका उपयोग पाप करने में करता है या पुण्य करने में यह उसके विवेक पर निर्भर करता है...   
-मॉडर्न योगी (स्वयं)
गलत रास्तों पर तीव्र  उन्नति से बेहतर है सही रस्ते पर धीमे-धीमे अग्रसर होना...    
-मॉडर्न योगी
हर दिन ऐसे जियो जैसे ये तुम्हारा पहला और आखिरी दिन हो...    
-अज्ञात
-मॉडर्न योगी

LONELINESS

(Autobiography of a modern yogi part – 1)
By
Yogi (Yogesh Malviya)


To Readers...

When my loneliness speaks, nothing left for me to say... If we listen sincerely, loneliness is the voice of our soul; if we hear and go ahead then we no longer need any master in this world, then our heart becomes the source of our inspiration. So I believe that I have no master except my loneliness. If our hearts are opened then no one can stop us being dynamic in the journey of the soul, when it came to my mind it began my inner journey automatically. My motivation becomes your inspiration that is the goal of my life...

Begining of my spiritual journey...

A few sentences that inspired me...
Be your own lamp (App deepo bhav )...                                                                                               
-Gautam Buddha
A single idea can light up the world...                                                                                     
-Unknown
Extinguishing once to glow is better than continuing to give smoke all life...       
 -Mahabharat
Every path of the world is formed by a nailed stumble traveler...                                                            -Sharatchandra (Shrikant)
If you show me a person without a problem then I will show you the perfect world...
-R.K. Narayan (The Guide)
God gave man two hands and gave the power to create; now he is using them to sin or virtue depends on it in his discretion...                                                                                                               
-Modern Yogi 
Slow progress is better than to move fast on the wrong path...                           
-Modern Yogi
Live every day like it's your first and last day...                                                   
-Unknown

- Modern Yogi



Comments

Popular posts from this blog

परमसत्य की खोज...16 (Discovery of the absolute truth ... 16)

  ( अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...16 17 दिसम्बर 2003 यदि सच्ची सफलता चाहते हो तो कड़े से कड़ा अनुशासन अपनाना पड़ेगा। संघर्षो के कष्टों को झेलना पड़ेगा। जितना अधिक संघर्ष करोगे, जितना अधिक कष्ट झेलोगे, उतनी ही शीघ्र आगे बढ़ोगे, उतने ही लक्ष्य के समीप पहुंचोगे। संघर्षों से खुद को बचाने वाले और किस्मत के भरोसे बैठे रहने वाले कभी सच्ची सफलता नहीं पा सकते, उन्हें सिर्फ दूसरों की सफलता की जूठन मिल सकती है। गलत तरीके से तथा दूसरों के सहारे मिली सफलता ज्यादा दिनों तक ख़ुशी तथा संतुष्टि नहीं दे सकती, वह तो मरे हुए शिकार के समान होती है। मरा हुआ शिकार लोमड़ी को ही प्रसन्न कर सकता है, शेर को नहीं। मरा हुआ शिकार तथा दूसरों की जूठन शेर के किसी काम की नहीं होती। -10:15 a.m. एक पल का निर्णय ही काफी होता है आपकी ज़िंदगी को स्वर्ग में बदल देने के लिए और एक पल का निर्णय ही काफी होता है आपकी ज़िन्दगी को बर्बाद कर नर्क बना देने के लिये। -10:30 a.m. अगर किसी का चूल्हा फोड़ोगे तो उसका पेट भी तुम्हे ही भरना पड़ेगा। उसकी पेट की आग में तुमको ही जलना पड़ेगा। उसकी भूख में तुमको ही मिटना पड़ेगा। तुम्हारा ...

परमसत्य की खोज...18 (Discovery of the absolute truth ... 18)

  ( अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...18 19 दिसम्बर 2003 लोग... अपने अज्ञान को अपना ज्ञान, अपने दोष को अपना गुण, अपनी कमजोरी को अपनी शक्ति, अपने अहंकार को अपनी शक्ति, अपनी शक्ति को अपनी कमजोरी, अपनी अक्षमता को अपना दुर्भाग्य, अपनी कायरता को चालाकी, भय तथा कापुरुषता को अक्लमंदी, भगोड़ेपन को अपनी होशियारी, सापेक्षिक भ्रमों को अपनी खुशियां, जीवन की सच्चाई को दुःख, असत्य (माया) को सत्य, सच्चे आनंद को चमत्कार, तथा सत्य को असंभव मानते हैं। -8:40 a.m. आज फिर वही विचित्र शक्ति दौड़ रही है मेरे शरीर में। आज फिर वही शक्ति मेरे रोम-रोम को स्पंदित कर रही है। आज फिर मैं रोमांचित हो रहा हूँ उसी शक्ति के प्रवाह में। अनगिनत तरंगें उठ रही हैं मेरे हृदयस्थल से और विस्तृत होकर फैलती जा रही हैं, विलीन होती जा रही हैं मेरे शरीर के चारों तरफ, आभामंडल में। आज फिर मेरे ह्रदय से उठ रहा है शक्ति का भूचाल और ले जा रहा है मुझे किसी दूसरी दुनिया में। मेरे मस्तिष्क के प्रकम्पन मुझे एक यात्रा का आभास करा रहे हैं, मानों मैं अपने सूक्ष्म शरीर के साथ किसी और ही दुनिया में विचरण कर र...

परमसत्य की खोज...11 (Discovery of the absolute truth ... 11)

  ( अंतर्यात्रा) परमसत्य की खोज...11 12 दिसम्बर 2003 विगत रात्रि का स्वप्न - मैं अपने एक मित्र सरदार जी के साथ अपने झोपड़ीनुमा सादे-कच्चे से मकान में एक रस्सी वाली नंगी खाट पर बैठा हूँ और हम खाना खा रहे हैं। सामने पटे पर सूखी रोटी और एक प्लेट में चटनी रखी है। मैं उसे प्रेमपूर्वक और लेने का आग्रह करता हूँ।   सरदार जी ताना मारते हुए कहते हैं -"ओए! ये भी कोई आदमियों का खाना है, चल मेरे साथ मैं बताता हूँ तुझे, आदमियों का खाना कैसा होता है।" मैं कहता हूँ -"भैया, हम गरीबों का खाना तो ऐसा ही होता है, हमें इसी खाने में वो संतोष मिल जाता है जो तुम्हें छप्पन तरह के पकवानों में नहीं मिलता।" सरदार जी कहते हैं -" तू मेरी एक बात बस मान ले, मैं तुझे बेईमान बनने को भी नहीं कह रहा हूँ और न ही कोई गलत काम करने को कह रहा हूँ, बस तू मेरा ये गिफ्ट ले ले। इसमें तो तुझे कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए।" मैं मना करना चाहता हूँ पर वह मेरे मुंह पर हाथ रखकर मुझे रोक देता है और वह गिफ्ट छोड़कर चला जाता है। मैं उसे खोलकर देखता हूँ तो उसमें एक सोने की ईंट रखी हुई मिलती है। उस ...