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तन्हाई बोलती है... (Lonliness says...)


तन्हाई बोलती है...
·                     किसी व्यक्ति पर अटूट श्रद्धा रखने से पहले यह परख लेना चाहिए कि वह इसका पात्र है भी या नहीं...
·                     विश्वास और श्रद्धा दो अलग-अलग अवस्थाएं हैं। आवश्यकता से अधिक विश्वास की परिणति श्रद्धा में होती है और कभी-कभी आवश्यकता से अधिक श्रद्धा धोखा भी खा जाती है...
·                     स्वाभिमान व्यक्तित्व को निखारता है लेकिन अहंकार व्यक्ति को गिराता है...
·                     मैं कभी किसी पर भरोसा नहीं करता सिवाय ईश्वर और अपने आत्मबल के...
·                     परिस्थितियां और हालात आदमी को बनाते या बिगाड़ते हैं लेकिन जो आदमी विपरीत परिस्थितियों और कठिन हालातों के दौर से गुजरता है, उसकी उपलब्धियों में महानता होती है...
·                     अक्सर हम दूसरे व्यक्ति के बारे में सोचते हैं कि वह ऐसा क्यों नहीं है, वैसा क्यों है लेकिन ये नहीं सोचते कि उसके ऐसा होने या वैसा होने के पीछे क्या परिस्थितियां हैं...
-३० अप्रैल १९९६
आवश्यकता से अधिक आर्थिक उन्नति अवनति का कारण बनती है...
-२४ मई १९९६
आवश्यकता से अधिक धन संपत्ति बुद्धि को भ्रष्ट कर देती है...
-२५ मई १९९६ 
जब मैं अपनी कल्पना शक्ति पर विचार करता हूँ तो पाता हूँ कि साधारण से साधारण घटनाओं और बातों का भी मुझ पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है।  मैं बहुत ज्यादा भावुक और जज़्बाती हो जाता हूँ।  मालूम नहीं मेरे अंदर ऐसी कौन सी शक्ति ग्रंथि या इन्द्रिय के रूप में है, जो मुझे इस ओर खींचती है।  कई बार ज़हन  में ऐसे विचार उफनते हैं जिनके पीछे कोई तर्क नहीं मिलते और फिर वो ज़हन में ही दबे रह जाते हैं...
- सितम्बर १९९६

Lonliness says...

Before we put our unshakable faith on a person we should examine that he is worthy for that or not...
Trust and reverence are two different phases. Trust in excess of requirement culminated in reverence and sometimes excess of reverence is also deceived...
Self-respect purifies the personality but the ego drops the person...
I do not trust anyone except my will power and the God...
The conditions and circumstances of a man makes and deteriorates him but the man who passes through a period of adversity and difficult circumstances, there is greatness in his achievements...
Often we think about the other person that why he is not like this, why he is like that, but we don’t think that what are the circumstances behind ‘why he is not like this, why he is like that’...
-30 April 1996
The extra economic growth causes downgrade...
-24 May 1996
The extra wealth corrupts the intelligence...
-25 May 1996
When I consider my imagination power, I Find that even ordinary events and things have a profound impact on me. I turn very emotional. I do not know what power is within me, in form of gland or organ which pulls me in a different world. Many times such thoughts ferment in mind which has no logic behind them and then these remains suppressed in the mind...
-8 Sep 1996

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