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तन्हाई से बातें... (Talk to loneliness...)


 तन्हाई से बातें...

हरेक व्यक्ति के जीवन में सुनहरा अवसर भेष बदल कर जरूर आता है लेकिन वे जो समय रहते सचेत हो जाते हैं और अवसर को पहचान कर उसे पकड़ लेते हैं, उसका उपयोग कर लेते हैं, चमक जाते हैं।  जो इसे खो देते हैं वे अपना जीवन बोझ की तरह बिताते हैं... 
-२३ फरवरी १९९७
संस्कारों के धरातल पर, विचारों और भावनाओं की पृष्ठभूमि पर ही आदर्शों और आचरणों का निर्माण होता है।
-३ अप्रैल १९९७
आरम्भ से ही बुद्धि की सत्ता बल की सत्ता पर शासन करती आई है और सदैव ही बल  बुद्धि पर निर्भर रहा है इसलिए यदि अपने आपको सबसे अधिक बलवान बनाना हो तो अपनी बुद्धि को बलवान बनाओ।
-४ अप्रैल १९९७
सत्य हमें निडरता व साहस प्रदान करता है।
-१२ अप्रैल १९९७
सत्य से हमें बल मिलता है, वह बल जो आत्मविश्वास को बढ़ता है और आत्मविश्वास से आत्म-संतृप्ति प्राप्त होती है, इसलिए सत्य को छिपाने के लिए कोई भी कार्य ऐसा नहीं करना चाहिए जो हमें अपनी ही नजरों से गिरा दे...
-१३ अप्रैल १९९७
नदियों की वे धाराएं, जो अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाने के लिए दिशा-विहीन होकर अलग बहने लगती हैं तथा वास्तविक नदी से कट जाती है, वे अपना अस्तित्व सिर्फ गड्ढों, पोखरों या बजबजाती नालियों के रूप में ही बना पाती हैं और जो जल धाराएं नदी की ही दिशा में प्रवाहित होती हैं वे अंत में समुद्र से मिल जाती हैं और अपना अस्तित्व भी समुद्र के ही रूप में  बनाती हैं। ठीक इसी प्रकार यदि हम उद्देश्य विहीन होकर क्षणिक आनन्दों में अपना जीवन बिताने लगें तो अंत में हमारा अस्तित्व भी गन्दी नाली की तरह होगा और यदि उनसे प्रभावित न होकर केवल अपने उद्देश्य-पूर्ति में अग्रसर हों तो यह जीवन समुद्र के अस्तित्व में विलीन हो जाएगा।
-२१ मई १९९७
बुद्धिमान, विवेकशील तथा योगी पुरुष क्षणिक आनन्दों की अनुभूति के लिए अपने मार्ग से विचलित नहीं होते, वे चरमोत्कर्ष की उन ऊंचाइयों में विलीन हो जाना चाहते हैं, जो सुख और दुःख के परे हो, जहाँ सुख और दुःख में कोई अंतर न हो और यही असीम आनंद है...
-२१ मई १९९७
कहीं मैंने पढ़ा था कि एक दिन की भूख और प्यास एक अमीर और एक गरीब के बीच का भेद मिटा देती है लेकिन मैं विचार करता हूँ तो पाता हूँ कि भूख और प्यास एक अमीर आदमी के क्रोध का कारण बनती है और एक गरीब आदमी के लिए एक आदत।  जब समस्याएं बार-बार आती हैं तो आदमी उनका अभ्यस्त हो जाता है और उनसे उदासीन हो जाता है...
-१ जुलाई १९९७
विचारों का सागर न जाने कितना गहरा है? क्यों एक लम्बे अंतराल के बाद फिर वही परिस्थितियां आकर सामने खड़ी हो जाती हैं जिन्हें मैंने कुछ समय पहले दूर करने की कोशिश की थी...
-१ सितम्बर १९९७


Talk to loneliness...

Golden opportunity comes in disguise in every person's life, people who become conscious and identify the opportunity and hold and use it, shine like a diamond. People who lose it they spend their life as burden.
-23 Feb. 1997

On the ground of Sacraments, on the background of Thoughts and feelings Ideals and conduct are built.
-3 Apr. 1997

From the beginning wisdom has the power to rule on the power of force and always force relies on intelligence. So to make yourself the most powerful make your mind strong.
-4 Apr. 1997

Truth provides us boldness and courage.
-12 Apr. 1997

Truth gives us strength, the strength that increases confidence and confidence gives self-saturation, so we should not do such a deed to hide the truth which drop us in our eyes.
-13 Apr. 1997

The streams of rivers which flow stragglingly without direction to make their independent existence and divert from the actual river, they make their existence only in pits, ponds or as drains filled with filth and the water streams flow in the same direction as the river, they finally fall into the sea and ensure their existence as the sea. Ditto, if we become devoid of purpose and start spending our life in momentary pleasures then the end of our existence will like a dirty drain. If we are not affected by the momentary pleasure and only forward in achieving our objective then it will be merged into the existence of ultimate life.
-21 May 1997

Wise, intelligent and masters do not deviate from their path for the sensation of momentary pleasures.  They want to be lost in the climax heights which are beyond the pleasure and pain. Where there is no difference between pleasure and pain. And that is the limitless enjoy.
-21 may 1997

I had read somewhere that one day hunger and thirst erases the difference between a rich and a poor but when I think, I find, hunger and thirst leads to a rich man's wrath and a poor man's habit. When Problems often arise then man gets its habitual and becomes indifferent.
-1 July 1997

 How deep the ocean of thoughts is, don’t know... Why, after a long interval, the same conditions appear those I tried to remove some time ago.
-1 Sep 1997.

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