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सुख कहीं सूख न जाएँ... (Happiness shouldn't dry...)


सुख कहीं सूख न जाएँ...
उसने कहा - कौन हो तुम?
मैंने कहा - एक प्रश्न...?
उसने कहा -  और उत्तर...?
मैंने कहा - '--------' (निरुत्तर, मौन में है मेरा उत्तर...)
उसने कहा - तुम अर्थहीन परिभाषा हो, ऐ प्यासे समंदर...
मैंने कहा - ये शब्दों का बवंडर है व्यर्थ का आडम्बर...
उसने कहा - भूला हुआ सा सपना है...
मैंने कहा - जो भी है पर अपना है...
उसने कहा - भटकती हुई राहें कहाँ ले जाएंगी...?
मैंने कहा - राहें ही एक दिन लक्ष्य बन जाएंगी...
उसने कहा - इस उलझे हुए जीवन से क्या मिल पाएगा...
मैंने कहा - खोकर ही जीवन में नवसृजन हो पाएगा...
(---------------------------)
और वो चुप हो गया.!
-१५ सितम्बर २००२



Happiness shouldn't dry...

She said - Who are you?
I said - a question...?
She said - and the answer...?
I said - '--------' (silence, silence is my answer ...)
She said - you're meaningless definition, O thirsty sea...
I said - This whirlwind of words is a pointless hypocrisy...
She said – It’s a forgotten little dream...
I said – Whatsoever, it is mine...
She said - where the wandering ways will take...?
I said - ways will become one day target...
She said - what will you get with this complicated life...
I said - losing will only create some meaningful in life...

(---------------------------)

And she fell silent.

-15 September 2002

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