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एक योगी (A yogi...)


एक योगी
आदमी वासना की गुलामी में जो न करे वह थोड़ा है। आदमी अपने विवेक से अँधा होकर अपना सारा जीवन वासना की भट्टी में झोंक देता है फिर भी उसे तृप्ति नहीं मिलती और उसे जितने ही जीवन मिलें वह उन सबको वासना की इस भट्टी में झोंक देना चाहता है।
हे प्रभु! तेरे जीव के जीवन में ये कैसी माया है? जिस प्रकार पतंगा जानता है कि चिराग की लौ में वह जल-भुन कर राख हो जाएगा पर फिर भी वहीं-वहीं मण्डराकर अंत में उस अग्निशिखा में कूद कर अपनी जान दे देता है। उसी प्रकार ये आदमी वासनाओं और कामनाओं में लिप्त होकर अपना जीवन बर्बाद कर लेता है। 
मैंने बचपन में एक योगी की कहानी सुनी थी, वह ऐसी थी कि एक साधु ने किसी कारणवश क्रोध में आकर एक आदमी को यह श्राप दे दिया कि जा तेरा पूरा खानदान वासना की आग में झुलसता रहेगा और यह आग तब तक नहीं बुझेगी, जब तक कि तेरे खानदान में एक भी आदमी जिन्दा रहेगा और तब से यह सिलसिला चला आ रहा था। पीढ़ी दर पीढ़ी इस अभिशाप को झेलती चली आ रही थी और अपना जीवन नरक बनाती आ रही थी। इस प्रकार दिन बीतने पर उसी खानदान का एक आखिरी वारिस पैदा हुआ। भाग्य से उसे अच्छा वातावरण मिला, सत्संग मिला, अच्छी पुस्तकें मिलीं और साथ ही मिली दुनिया की तमाम ठोकरें, जिन्होंने उसके जीवन को झिंझोड़ कर रख दिया। उसका जीवन प्रश्नों की अनुगूंज से भर गया। और जाग्रत हो गया उसका विवेक, उसकी अन्तर्चेतना और उसने इस श्राप का तोड़ निकाल लिया। उसने सोचा कि ऐसे अभिशप्त खानदान के जीने का कोई लाभ नहीं। इससे तो अच्छा यही होगा कि ये खानदान यहीं मुझ पर ही ख़त्म हो जाए और इसी विचार में उसे समाधान मिल गया। और उसने वासना का मार्ग त्याग कर सेवा का मार्ग अपना लिया। उसे दूसरों में खुशिया बांटकर, दूसरों की सेवा करके उनकी परेशानियां दूर करने में ख़ुशी मिलने लगी और वह एक योगी बन गया। 
-५ अगस्त २००२

A yogi...

He is not a man who is in bondage to lust. The man blind from his conscience throw his whole life into the furnace of lust, yet he does not get satisfaction and as many he will find the lives he wants to lose all of them in the furnace of the lust.
Oh God! What is this illusion in the life of thy creatures? As the moth knows that it will be burn and turned into ashes in the flame of the lamp but still hover there and there and finally gives his life by jumping into the flame. Similarly, the people involved in lust and desires take to ruin his life.
I had heard the story of a Yogi in childhood; Once it so happened that a monk being angry for any reason, gave a curse a man that your whole pedigree will singe in the fire of lust and the fire will not extinguish until a single man will live in thy pedigree and then this consecution was continue. Generation by generation the pedigree was suffering the curse and had been making their life a hell. At the end of the day the last heir of the Pedigree was born. Thus a day came when the last heir was born in the pedigree. By the luck he got good atmosphere, good discourses and good books as well as he found all of the world dusting, which shook his life. His life was filled with echoes of the questions and it became aware his conscience, his Inner consciousness and finally he drew a cure to this curse. He thought there is no advantage of living of such a cursed family. So it is better that the dynasty died out here to me. He found the solution in this idea. And he abandoned the path of lust taken to the path of service and he got joy in sharing joy to others, serving others, to overcome their troubles and he became a yogi.
-5 August 2002

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