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भावनाओं का समुद्र... (The sea of emotions...)


भावनाओं का समुद्र...
हाँ! मैंने देखा है...
सुहाग की निशानी को नालियों में बहते हुए...
माँ की ममता को दम तोड़ते हुए...
माँ को खुद वात्सल्य का गाला घोंटते हुए...

ये सारा खेल भावनाओं का ही तो है,
हाँ! केवल कुछ भावनाओं का,
ज़िंदगी उम्र भर भावनाओं के झूले में झुलाती है,
और आखिरी में छोड़ जाती है - निस्तब्धता, नीरवता...
और केवल कुछ मूक प्रश्न,
जिनके उत्तर में मिलती है - तड़प और घुटन...

जीवन का अस्तित्व क्या है?
सिर्फ तड़पते और सुलगते रहने के सिवा,
जीवन का अर्थ क्या है?
कुछ आशाओं और अभिलाषाओं के बंधन के सिवा,
कुछ अंतहीन स्वप्नों की कड़ियों के सिवा...

जीवन का अंत क्या है ?
एक रिक्तता, शून्यता और एक चुभन के सिवा,
केवल एक प्रश्नचिन्ह के सिवा,
जो जीवन स्मृतिपटल पर छोड़ जाता है...
ये सारा संसार भावनाओं का एक समुद्र है,
जिसमे भावनाएं तरंगों की तरह हिलोरें लेती रहती हैं,
बनती और बिगड़ती रहती हैं...
-२८ दिसंबर २००१

आज मैने खुद से एक प्रश्न किया-

'बता! तू कौन है?'
उत्तर मिला-'एक प्रश्न।'
-२८ दिसंबर २००१

ज़िन्दगी कुंवारी  है और मौत की डोली का इंतज़ार कर रही  है  और मौत का आलिंगन और चुम्बन फिर एक नए जीवन की शुरुवात होगी...
-२९ दिसंबर २००१

मेरी रफ़्तार इतनी तेज़ है कि कोई भी मेरे साथ कदम मिलाकर नहीं चल सकता इसलिए मेरा न कोई साथी हो सकता है और न कोई हमसफ़र...
-१९ मार्च २००२ 

The sea of emotions...

I have seen,
Yeah! I have seen...
Symbol of wedding flowing into the drains,
Dying the Motherhood,
The mother strangling own mother’s love...

This whole game is only of feelings,
Yeah! Only a few emotions,
Life swings into the cradle of emotions throughout the ages,
And finally leaves- Serenity, Silence...
And only a few dumb questions,
Which meet to the answer- Yearning and suffocation...

What is the existence of life?
Only except stay suffering and smoldering,
What is the meaning of life?
Bonds of some hopes and desires therewith,
Except for a few episodes of endless dreams...

What is the end of life?
Except an emptiness, emptiness and a prick,
Except a question mark,
Which is left by the life on the memory board...
This whole world is a sea of emotions,
In which, emotions undulate like waves,
Which are formed and deformed...
-28 Dec 2001

 Today, I questioned myself-
‘Tell! Who are you?’
Answer found-‘A question.’
-28 Dec 2001
 Life is virgin and awaiting the palanquin of death. Embrace and kiss of death will start a new life again...
-29 Dec 01
 My speed is so fast that no one can pace with me, so I can neither have a partner nor a companion...
-19 Mar 2002

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