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एक तलाश (A search...)


एक तलाश


सुबह हुई...
दुनिया जागी...
परिंदों ने अपने घोंसले छोड़ दिए...
अपने दाना-पानी की तलाश में...
और शुरू हुआ एक अनजाना सफर...
एक अनजाना भटकाव...
मैं भी निकला... 
एक अनजाने सफर पर ...
एक अनजाने भटकाव में ...
फर्क सिर्फ इतना था कि परिंदे जानते थे की उनके भटकाव का मकसद क्या है ...
मगर मैं अब तक अपने भटकाव का मकसद नहीं जान पाया ...
अपनी भूख और प्यास को नहीं समझ पाया ...
और फिर भी शुरू हो गई एक तलाश, ज़िंदगी के भटकाव में ...
हाँ, सच है, ज़िंदगी एक भटकाव है ...
एक अनजाना सफर है ...
पर कौन जाने, कहाँ ख़त्म हो ...
कितनी सदियों की मरीचिका है ...
और कितनी सदियों तक यूँ ही चलती रहेगी ...
कस्तूरी मृग नहीं जानता कि ये खुशबू उसी के अंदर छिपी है ...
पर मैं जानता हूँ कि ये खुशबू मेरे ही अंदर बसी है ...
लेकिन बाहर की राहें ढूंढना आसान है ...
पर अपने भीतर की राह ढूंढना मुश्किल है ...
पर फिर भी जारी है... एक तलाश ...
-२७ अप्रैल २००२ 


A search...
 Morning occurred ...
The world awakened ...
Birds abandoned their nests ...
In search of their mage-water ...
And began an unknown journey ...
An unknown wander ...
I also turned out ...
On an unknown travel ...
In an unintentionally wandering ...
The only difference was that the birds knew that the purpose of their wandering ...
But I still did not know the cause of my disorientation ...
I could not understand my appetite and thirst ...
And Yet started a search, in the wandering of life ...
Yes, it’s true, life is a wandering ...
Is an unknown journey ...
But who knows, where to end ...
How many centuries old the mirage ...
And how many centuries  it will go on a whim ...
Musk deer do not know the fragrance is hidden inside him ...
But I know this fragrance resides inside my own ...
But it's easy to find ways outside...
But hard to find your own inner path ...
But yet the search continues ...
-27 April 2002

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