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पूजा की सार्थकता... (Significance of worship...)


पूजा की सार्थकता...
मेरे विचार से ईश्वर की पूजा वस्तुतः इतिहास की पूजा है।
 धर्मग्रन्थ क्या हैं?
धार्मिक और आध्यात्मिक घटनाओं तथा विचारों का इतिहास,
और धर्म क्या है?
धर्मग्रंथों का आचरण। जब हम ईश्वर के रूप में किसी अप्राकृतिक मानव रूप की पूजा करते हैं तो वह रूप या तो ऐतिहासिक होता है या पौराणिक। वास्तव में हम उस रूप की पूजा नहीं करते बल्कि उस रूप में निहित शक्ति की पूजा करते हैं जो शक्ति इतिहास में पूर्व-वर्णित होती है।  अतः अवतारों की पूजा वस्तुतः उन अलौकिक शक्तियों की पूजा है जो समय-समय पर उद्घाटित हुईं। इन अवतारों की पूजा करके हम उनकी शक्तियों और आदर्शों को अपने सामने रखते हैं, जो हमारी शक्तियों को उद्दीपित करते हैं, हमारी अन्तर्निहित शक्तियों को उत्प्रेरित करते हैं।
अतः पूजा एक मार्ग है अपनी अंतर्मुखी शक्तियों को जानने तथा समझने का तथा उनका जनकल्याण के लिए उपयोग करने का, मगर वस्तुतः ऐसा नहीं होता, वस्तुतः तो हमारी पूजा अंधानुकरण ही होती है, जिसमे करने वाले को पता भी नहीं होता कि हम क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं?
-२५ मार्च २००१ 
असफलताएँ सफलताओं से भी कहीं बढ़कर मार्गदर्शक होती है। सफलताओं में अहम निहित होता है जो प्रायः मार्ग से भटका देता है। असफलताओं में आत्मग्लानि के साथ बिखरने का दुःख होता है परन्तु यदि सकारात्मक दृष्टिकोण को कमजोर न पड़ने दिया जाए तो असफलता की हर कड़ी सफलता की कड़ी को पास लाती है।
-६ अप्रैल २००१
व्यक्ति अपनी उपलब्धियों से पहचाना जाता है।
-१२ अप्रैल २००१
Significance of worship...
In my view, Worshiping God is literally worshiping history.
What are religious texts?
The history of religious and spiritual events and ideas.
What is religion?
Conduct of the Scriptures.
When we worship God as a natural human form then it is either historical or mythical. In fact, we do not worship that form but worship the power vested in it. The power which is pre-described in the history. So worship of incarnations is literally worship of the supernatural powers which periodically revealed.
 Worshipping these incarnations we put their strengths and ideals before to stimulate our powers.
So worship is a way of knowing and realizing our inward powers and to use them for other’s welfare.
But actually it does not happen. In fact, worship is only blind emulation in which we would not know that what we are doing and why?
-25 Mar 2001
 Failures proves better guide than successes. Achievements are full of ego which often strays from the path.  A man feels guilt and falls apart in sorrow of failure. But if positive outlook should not be weak then each link of failure brings the link of success near.
-6 Apr 2001
 A person is identified by his achievements.
-12 Apr 2001

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