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क्या मैं पागल हूँ... (Am I mad...)


क्या मैं पागल हूँ...
क्या आपने कभी किसी परिस्थिति में महसूस किया है कि आप पागल हो जाएंगे? लोगों की नजरों में पागलपन एक रोग है, एक मानसिक असंतुलन की अवस्था है,एक बीमारी है लेकिन क्या आपने यह जानने की कोशिश की है कि एक पागल की नजर में उसका पागलपन क्या है? जहाँ तक मैंने अनुभव किया है कि एक पागल की नज़रों में उसका पागलपन दुनिया का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण कार्य है, वह उसकी महानता भी है और उसकी सनक भी...
शायद हर महान व्यक्ति अपने लक्ष्य के लिए पागल रहता है और उसका पागलपन वास्तविक पागलपन से कुछ प्रतिशत ही कम रहता है. हर पागल अपने आपको सबसे अधिक महान और बुद्धिमान समझता है और दूसरों को पागल। शायद इसीलिए किसी ने कहा है की दुनिया एक बिना दीवारों का पागलखाना है...
 पागलों में सामान्य लोगों से हटकर कुछ गुण भी होते हैं। उनका अंतःकरण एक बच्चे की तरह निर्दोष होता है। उनमे कपटाचरण की भावना बिलकुल नहीं होती। या तो वे अत्यंत भावुक और संवेदनशील होते हैं या अत्यंत क्रूर और हिंसक, क्योंकि वे दिल के ज्यादा करीब होते हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में तब हम पर भी पागलपन सवार हो जाता है जब विचार-शक्ति की तीव्रता संवेदनशून्य कर देती है...
 -२८ अप्रैल २००२  
Am I mad...

Have you ever felt that in any circumstances you would be mad? Madness is a disease in the public eye, it is a state of mental imbalance, it is a disease but have you ever tried to find out that what the madness in the eyes of a madman is! As far as I have experienced that in the eyes of a mad, his madness is the world's largest and important task, it is his greatness as well as his craze...
Perhaps every great man is mad for his goal and his madness is only a few percent of the actual madness. Every mad considers himself the most noble and wise and others mad. Maybe so someone said that the world is a madhouse without walls...
Mad have some properties different from normal people. Their inner sense is innocent like a child. There is no sense in them to conduct fraud. Either they are very emotional and sensitive or extremely brutal and violent, because they are closer to the heart. In certain circumstances we also feel the aboard of insanity when intensity of ability to think makes insensitive...
-28 April 2008

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