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ज्ञान...काम का रूपांतरण... (Knowledge... the conversion of sexual desires...)


ज्ञान...काम का रूपांतरण... 

ज्ञान के राजमार्ग पर पहुंचने से पहले काम की संकीर्ण पुलिया से होकर गुजरना पड़ता है। जो काम की इस संकीर्ण पुलिया को अपना संतुलन बनाकर पार कर लेते हैं, वे ही ज्ञान के राजमार्ग पर चलने के अधिकारी होते हैं।
यदि व्यक्ति अपने भीतर के काम को ज्ञान में रूपांतरित कर उसका उपयोग रचनात्मक एवं सृजनात्मक कार्यों में करता है तो वह कामरूपी संकीर्ण पुलिया में फंसने के बावजूद संघर्ष करके इससे बाहर निकल आता है अन्यथा जीवन भर इसी में फंसा रहता है। व्यावहारिक लोग कहते हैं कि काम के उपभोग के बिना जीवन संभव नहीं अर्थात विवाह के बिना जीवन कठिन हो जाता है। यह सत्य है कि काम के उपभोग के बिना जीवन व्यतीत करना बड़ा ही जटिल है परन्तु यह आवश्यक नहीं की काम का उपभोग केवल दाम्पत्य जीवन में ही किया जाए। काम का उपभोग रचनात्मक एवं सृजनात्मक कार्यों में भी किया जा सकता है। काम एक बहुत बड़ी शक्ति है। इसका ज्ञान में रूपांतरण ज्ञान के नए आयामों को जन्म देता है। अध्यात्म, विज्ञान और साहित्य में नित नई खोजें और नए रहस्य इसी के उदाहरण हैं।
-११ नवंबर २००३
आपसे ईर्ष्या करने वाला आपकी नफरत या आपके क्रोध का अधिकारी नहीं बल्कि आपकी दया का पात्र है। आपको उस पर दया करना चाहिए कि वह जिस चीज से ईर्ष्या कर रहा है उस चीज का उसमे अभाव है।
-१३ नवंबर २००३



Knowledge... the conversion of sexual desires...

Before one reach the highway of knowledge one should pass through the narrow culvert of sexual desires. People who cross the narrow culvert of sexual desire making their balance; they tend to possess to walk on the highway of the knowledge.
If a person get success to convert his inner sexual desire into wisdom and uses it in a constructive and creative functions then he comes out from the narrow culvert of sexual desire by conflict despite implicated in it otherwise remains implicated in the same whole life. Practical people say that the life is not possible without consumption of sex that a life gets hard without marriage. It is true that to live without consuming sexual desire is a very complex task, but it is not necessary to be consumed only in married life. Consumption of sexual desires can also be used in constructive and creative functions. Sexual desire is a very large force. This conversion of sexual desire into knowledge gives rise to new dimensions of knowledge. The new discoveries eternally in Spirituality, Science and Literature and new mysteries are the examples of that.
-11 November 2003
The person who envies you does not possess your hatred or anger but deserve your mercy. You should take pity on him that he is jealous of the thing that thing is lacking in it.
-13 November 2003

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