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ज़िन्दगी की शराब... (Wine of life...)

ज़िन्दगी की शराब...
मेरा प्याला खाली था...
साकी आया, निगाहों से इशारा किया और उड़ेल दी प्यास और तड़प, मेरे पैमाने में...
फिर उसने एक सुराही उठाई और उड़ेल दिए दुःख , पीड़ा और आर्तनाद...
कुछ देर बाद वह फिर आया...
अब उसके पास दूसरी सुराही थी...
उसने मुझे थोड़ा सा मस्त किया और मिला दी थोड़ी सी मस्ती और ख़ुशी की शराब, मेरे पैमाने में...
फिर वह दूसरे मयकशों के पास गया...
अगली बार वह आया तो उसके हाथ में सपनों की शराब थी...
उसने उड़ेली और चला गया...
फिर वह भूख और वहशत की शराब लेकर आया...
और फिर मेरे प्याले में छलका गया...
अब भी उसका मन नहीं भरा,
वह फिर आया और साथ लाया आंसुओं और आहों की शराब...
कुछ देर बाद जब वह आया तो उसके पास कोई दूसरी ही सुराही थी जो सुख और दुःख की शराब की सुराहियों से अलग थी...
और अब उसने उड़ेली, अनुभूतियों और संवेदना की शराब...
जो ख़ुशी और दुःख की शराबों को मिलाकर बनाई गई थी...
और इस तरह मेरे प्याले में एक अलग तरह की शराब थी...
सबसे ज्यादा नशीली... ज़िंदगी की शराब...
जिसके नशे में मैं आज भी झूम रहा हूँ...
-५ अक्टूबर २००२ 


Wine of life...

My glass was empty...
Barmaid came, gestured from the eyes and poured the thirst and yearning, in my glass...
Then he picked up a jug and poured the misery, pain and outcry...
A few minutes later, she came back...
Now she had another jug...
She made me a little slobbery and mixed a wine of a little fun and joy, in my glass...
Then she went to the other drinker...
The next time she came with the wine of dreams in his hand...
She poured it and gone...
Then she brought the wine of hunger and heathenism...
And spilled again into my glass...
She was not satisfied yet,
She came again and brought wine of tears and sighs...
After some time when she came, she had any other jug, which was different from the jugs of wine of pleasure and pain...
And now she poured wine of feelings and condolences,
which was formed by mixing the wines of Joy and sorrow...
And this way I had a different wine in my glass...
Most intoxicating...  wine of the life...
The drunk I'm still vacillating...

-5 October 2002

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