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हिंसा का मूल... (The origin of violence...)


परीक्षण तथा विश्लेषण संदेहों को मिटाने की वैज्ञानिक पद्धति है।
-१३ अक्टूबर २००२   

हिंसा का मूल...
आधुनिक दौर में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति को देखकर हमें सोचना पड़ता है कि हिंसा कहाँ तक उचित है और हिंसा का मूल क्या है?
हिंसा का मूल अन्तर्निहित भय तथा कायरता है... हिंसा अपने अंदर मौजूद डर को छिपाने का एक तरीका है, असुरक्षा की भावना से उपजे डर को नकारने का प्रयास है इसलिए याद रखिये... जो व्यक्ति सबसे अधिक हिंसक है वह दुनिया का सबसे अधिक कायर और डरपोक व्यक्ति होगा...
इस दुनिया में जितने भी तानाशाह लोग हुए हैं, वे अपने शुरूआती जीवन में बेहद कमजोर और डरपोक थे... वे जीवन भर इसी कमजोरी से भागते रहे...और अंत में उन्हें अनावश्यक बल-प्रदर्शन (हिंसा) का सहारा लेना पड़ा... जो मानसिक रूप से बलवान होगा, उसे बल-प्रदर्शन की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। जिस प्रकार कोई बहुत बड़ा पहलवान प्रदर्शन के लिए किसी छोटे से बच्चे के साथ कुश्ती नहीं लड़ता उसी प्रकार मानसिक रूप से संपन्न व्यक्ति अन्य दुर्बल व्यक्तियों के सामने बल-प्रदर्शन नहीं करते, बल्कि दयालुता पूर्वक व्यवहार करते हैं इसलिए मानसिक रूप से बलवान व्यक्ति के अंदर वैसी ही करुणा उत्पन्न हो जाती है जैसी कि बुद्ध के अंदर  उत्पन्न हुई थी।  
असहाय और निर्बलों पर बल-प्रयोग करना साहस नहीं बल्कि कायरता है अतः इस बात को सावधानी पूर्वक जाँचे कि आपके अंदर उत्पन्न होने वाला क्रोध भी कहीं आपकी मानसिक दुर्बलता का प्रतीक तो नहीं...
-१३ अक्टूबर २००२

Experimentation and analysis is the scientific method to erase doubts.

-13 October 2002

The origin of violence...
Looking at the growing violent tendencies in modern times, we have to think that how much violence is justified and what is the origin of violence?
The origin of violence is the underlying fear and cowardice... Violence is a way to hide the inside fear, it is an attempt to deny the fear arising from the insecurity sense... so remember the person who is the most violent of the world will be the most cowardly and timid person...                                                            
All the dictators in this world are the people who were extremely weak and timid in their early life... They were fleeing from this weakness in their entire life... And finally, they had to resort to unnecessary stunt (violence)... Who will be mentally strong, he will not need a force performance. As a huge wrestler do not go to fight with a little kid to show his talent so mentally rich person do not fight with mentally weak people, but treat them with kindness. So inside the mentally strong person same compassion arises as Buddha had occurred within.
To make the use of force on helpless and weak is not the courage but cowardice. Therefore, verify carefully that ever if the anger arising inside you may not be the symbol of mental infirmity...
-13 October 2002


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