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अंतर्यात्रा (Adventure of the truth)

आज के योगी की आत्मकथा भाग - दो
(अंतर्यात्रा)
एक दृष्टि...
ये सारे उपदेश मैंने स्वयं को दिए हैं। यदि आपको लगता है कि इसका अंशमात्र भी आपके कुछ काम आया तो मैं धन्य हुआ, मेरा जीवन कृतार्थ हुआ...
जिनमे सत्य का साक्षात्कार करने का साहस है, जो सत्य को साहस पूर्वक स्वीकार कर सकते हैं, वे ही इसे पढ़ें, झूठे और फरेबी लोग इसके पृष्ठ न ही खोलें तो उचित होगा, उनके लिए ये मृत शब्द हैं और कुछ नहीं। अपने सांचे में ढालने के बाद ही तुम सच जान पाओगे, अनुभव कर पाओगे, लेकिन सावधान! सांचे के अंदर बेईमानी की राख न हो।  
ये विचार एक गहन और गंभीर प्रयोग के परिणाम हैं। जिन्हे आप तभी समझ सकते हैं, जब ये प्रयोग आप भी कर के देखें। तर्क नहीं, अवलोकन ही है एकमात्र मार्ग सत्य का।
'आपके भीतर क्या चल रहा है, इसका हर समय अवलोकन करना ही आत्म-अवलोकन है।'
यदि इसे पढ़ने के बाद आपके अंदर प्रश्न नहीं उठें तो समझियेगा कि आपने ठीक से पढ़ा ही नहीं। ये मेरा धर्मग्रन्थ नहीं कर्मग्रन्थ है। इसे पढ़ने के बाद यदि आपके भीतर उदासी का तूफ़ान उठता है तो समझिए कि आप भी सत्य को पाने के लिए उत्सुक हैं। 
- मॉडर्न योगी
Autobiography of a modern yogi part-II
 (Adventure of the truth)
At glance...
I have given all these preaching to myself. If you think, a bit of it availed you then I am blessed, my life became gratified...
The text should be read by the people, who have courage to face the truth, the people, who can accept the truth with courage. It would be fair if false and fraudulent people should not open its page, for them these are nothing but just dead words. Only then you will be able to know the truth, when you mold the truth in your mold, but be careful! There should not be the ash of foul inside the mold.
These ideas are the results of a profound and serious experiment which can only be understand by doing. Not logic, observation is the only route to truth.
To watch -‘What's going on inside you?’ all the time is the self-observation.’
If questions are not arising in your mind after reading it, then know that, you have not read properly.
It is not my theology but account of my work. After reading, if you feel a storm of sadness within you, then know that you are eager to get the truth.
-Modern Yogi.

Comments

  1. सत्य की खोज ही भ्रम के भटकाव को जन्म देता है और झुटू उसमे संस्ये पैदा कर मन को विचलित कर देता है

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  2. सत्य की खोज में भ्रम से भी सामना होता है और संशय से भी और विचलन से भी। लेकिन जब आप में सत्य की खोज का साहस उत्पन्न होता है तो उसके आगे कुछ भी नहीं टिक पाता सब ढह जाता है और बच जाता है केवल सत्य।

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